जयपुर की भीषण आग पर हाईकोर्ट द्वारा सरकार से जवाब-तलब
सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित आईओसी के डिपो में लगी भीषण आग के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह विस्तार से बताए कि तेल डिपो के हादसे को रोकने के लिए सरकार ने क्या उपाय किया और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए सरकार की क्या योजना है। यह भी बताने को कहा गया है कि तेल डिपो के आसपास निर्माण कैसे हो गए। यह अंतरिम आदेश मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला एवं न्यायाधीश मुनीश्वरनाथ भंडारी की खंडपीठ ने तेल डिपो में आग बुझाने में सरकार के नाकामी को लेकर अधिवक्ता सुनीलकुमार सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर 3 नवम्बर को सुनवाई करते हुए दिया।
खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आगामी सुनवाई पर यह बताए कि हादसे में जो घायल हुए हैं उनके लिए एवं मृतकों व उनके परिजनों के लिए क्या किया? हादसे से प्रभावित गरीबों एवं उद्योगकर्मियों के लिए राहत के लिए क्या किया जा रहा है और आग से हुए पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। मामले की आगामी सुनवाई 9 नवंबर तय करते हुए राज्य सरकार से भविष्य में ऐसे हादसे रोकने की योजना, विस्थापितों के पुनर्वास की योजना, मृतकों व घायलों के मुआवजे सहित पर्यावरण प्रदूषण रोकने के उपाय के संबंध में जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि याचिका में आईओसी के तेल डिपो में आग को बुझाने में सरकार के विफल रहने को चुनौती दी गई। इसमें कहा कि आग बुझाने के लिए सरकार ने कोई ठोस कदम नहंीं उठाया, जिससे जान व माल की भारी हानि हुई है। सरकार केवल मूकदर्शक बनकर रह गई और ज्यादा तबाही होने का इंतजार करती रही। डिपो में लगी आग दमकल से नहीं बुझ सकती, बल्कि वायु माध्यम ही इसे बुझाने का जरिया है। कुवैत में जब तेल के कुओं में आग लगी थी तो वहां की सरकार ने चंद घंटों में ही उस पर काबू पा लिया था। ऐसी आग को बुझाने के लिए कुवैत की मदद ली जा सकती है।
खंडपीठ ने कहा कि पांच पैराग्राफ की जनहित याचिका दायर की गई है जिसकी अपेक्षा एक विधि ज्ञाता अधिवक्ता से नहीं की जा सकती। बार सदस्य एक एडवोकेट को शोध करके पीआईएल दायर करनी चाहिए। यह बार और बैंच दोनों के लिए अच्छा होगा। चूंकि मामला गंभीर है और पीआईएल के तकनीकी पहलुओं पर जाने की बजाय कुछ बिन्दुओं पर सरकार से जवाब-तलब किया है।
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