आइए मुकद्दमे तलाशें

  • रिश्वत में नकद, ह्विस्की, जमीन के सौदे में फिक्सिंग की आरोपी महिला जज को निर्दोष घोषित किया गया

    रिश्वत में नकद, ह्विस्की, जमीन के सौदे में फिक्सिंग की आरोपी महिला जज निर्मल यादव को लगभग 15 महीने पुराने एक मामले में, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की क्लीन चिट मिल गई है। मीडिया द्वारा यह माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णायक मंडल ने कानून मंत्रालय की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है जिसमें यादव को दोषमुक्त करने की बात कही गई है। इस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवम्बर को जज के घर नकद मामले का समापन कर दिया। इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि निर्मल यादव का ट्रांसफर उत्तराखंड हाई कोर्ट में किया जा सकता है। पिछले साल अगस्त में जस्टिस निर्मल यादव के घर भेजे गए 15 लाख रुपये को नाम की गलतफहमी में जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर पहुंचा दिया गया था। इसके बाद यादव पर पैसे लेने के इस मामले का आरोप सामने आया। इस मामले में नाम सामने आने पर जस्टिस यादव को न्यायिक दायित्वों से अलग कर दिया गया था।

    कानून मंत्रालय के सूत्रों का हवाला देते हुए खरों में बताया गया है कि तत्कालीन अटॉर्नी जनरल मिलन बनर्जी की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के निर्णायक दल को भेज दिया है। अटॉर्नी जनरल की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस यादव पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सुबूत नहीं हैं। सीबीआई के निदेशक और अभियोजन निदेशक के बयानों में फर्क होने के कारण अटॉर्नी जनरल को कानून मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। इसमें जज पर मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार मांगे गए थे। इस मामले में पंजाब के राज्यपाल एस.एफ. रॉड्रिग्ज ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर के साथ विमर्श करने के पश्चात सीबीआई जांच का सुझाव दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के के चीफ जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन ने इस मामले की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय जजों की समिति का गठन किया था।

1 ने गवाही दी:

  1. इतने झमेले के बाद निर्दोष सिद्ध हो जाने के बाद भी लोग क्या उन्हें एक निष्पक्ष जज के रूप में देख पाएँगे? ऐसे में उन्हें जज बनाए रखने का क्या औचित्य रह गया है और उन का भी जज बने रहने का क्या औचित्य रह जाएगा।

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