आइए मुकद्दमे तलाशें

  • अदनान सामी की शादी व तलाक का मुद्दा, मुस्लिम कानून को लेकर फिर अदालत में

    पार्श्व गायक अदनान सामी की पत्नी सबा गलादारी ने बंबई हाई कोर्ट में एक पारिवारिक अदालत के फैसले को चुनौती दी है जिसने हलाला का पालन नहीं करने के कारण उसके विवाह को अवैध करार दिया है। हलाला में किसी तलाकशुदा पत्नी को अपने पहले पति से शादी करने के लिए पहले किसी अन्य पुरुष से विवाह करना होता है और उसके साथ शारीरिक संबंध में जाना होता है। उसके बाद उसे तलाक दे कर पूर्व पति से शादी करनी होती है। इस अपील ने निकाह और तलाक पर मुस्लिम कानून सहित कई मुद्दे खड़े कर दिए हैं । संयुक्त अरब अमीरात की नागरिक सबा ने दलील दी है कि पारिवारिक अदालत इस्लामी कानून के सिद्धांतों को समझने में नाकाम रही। उसने दावा किया कि उसके मामले में हलाला कतई जरूरी नहीं है।


    सामी और गलादारी ने 2001 में निकाह किया और फिर 2004 में तलाक ले लिया। दोनों ने लेकिन 2007 में फिर शादी कर ली। पारिवारिक अदालत ने 13 अक्टूबर को उनकी शादी को यह कहते हुए अवैध बताया कि उन्होंने इस मामले में हलाला का पालन नहीं किया। अपीलकर्ता ने दलील दी कि सामी ने हलाला का मुद्दा उसे तोहफे में दी गई सम्पत्ति पर फिर से दावे के लिए उठाया। उसने कहा कि मुस्लिम कानून के तहत पति द्वारा दिया गया तोहफा वापस नहीं लिया जा सकता। पिछले साल मई में सामी ने उसे अंधेरी के लोखंडवाला इलाके में स्काई गार्डन बिल्डिंग में दो फ्लैट तोहफे में दिए थे।

    सबा ने अपनी अपील में दावा किया है कि उसके मामले में हलाला इसलिए लागू नहीं होता क्योंकि यह तीन बार 'तलाक ' का मामला नहीं है। सबा ने कहा कि पारिवारिक अदालत ने इस प्राचीन प्रथा पर गलत भरोसा किया और कई उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय के उन फैसलों को नजरअंदाज किया जिनमें तीन बार तलाक की प्रथा खत्म कर दी गई है। उसने कहा कि उसका मामला एक बार तलाक की श्रेणी में आता है जिसके लिए हलाला जरूरी नहीं है । इस प्रथा में कोई दम्पति नए विवाह अनुबंध और नए दहेज के साथ फिर से ब्याह रचा सकता है।

    उसने यह भी कहा कि पारिवारिक अदालत ने इस्लामी कानून के सुस्थापित सिद्धांत का पालन नहीं किया जो किसी शादीशुदा दम्पति को तलाक की अपनी शर्तों को निपटाने की इजाजत देता है। सबा के वकील महेश जेठमलानी ने दलील दी कि पारिवारिक अदालत के बाद उसके मुवक्किल के अधिकार नहीं मिल पा रहे। सामी के वकील विभव कृष्णा ने समय मांगा और जस्टिस बिलाल नाजकी और जस्टिस एस.ए. बोबाडे ने उनसे 27 नवम्बर तक जवाब तलब किया।

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