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वकील की हत्या वाली पूरी फाईल अदालत से गायब: कड़कड़डूमा कोर्ट में हड़कंप
दिल्ली की जिला अदालतों से अपराध व अपराधियों से जुड़े दस्तावेज भी गायब होने लगे हैं। इस तरह का एक मामला कड़कड़डूमा कोर्ट में सामने आया है। यहां की एक अदालत से हत्या जैसे जघन्य अपराध से जुड़े एकाध दस्तावेज नहीं, बल्कि पूरी केस फाइल ही गायब कर दी गई और कोर्ट के प्रशासनिक अधिकारियों को खबर तक नहीं हुई। मामले का पता तब चला, जब संबंधित मामले में पुलिस ने हत्या के केस को बंद करने संबंधी अपील अदालत से की। इस घटना से कोर्ट में काम करने वाले कर्मचारियों एवं मामले से संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मचा है। जबकि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पूर्णचंद की अदालत ने मामले में लापरवाही बरतने वाले कोर्ट अहलमद से इस बारे में 4 दिसंबर तक जवाब-तलब किया है।
खबरों के अनुसार, चंद्रकला शर्मा के पति एडवोकेट योगेंद्र पाल शर्मा 2 मार्च, 2003 को विकास मार्ग शकरपुर स्थित अपने कार्यालय में बैठे थे। इसी समय वहां एक अज्ञात व्यक्ति आया और योगेंद्र पाल को गोली मारकर भाग गया। योगेंद्र पाल को वालिया नर्सिग होम में दाखिल कराया गया था जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था। इस संबंध में शकरपुर थाना की पुलिस ने चंद्रकला शर्मा की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की जिससे वकील योगेंद्र पाल के हत्यारे पकड़े नहीं जा सके।वर्षो तक थाना-पुलिस के चक्कर काटने के बाद मामले के संबंध में पुलिस से जांच कराने के लिए उन्होंने 10 अक्टूबर, 2008 को अदालत में याचिका दायर कर पुलिस से मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। शकरपुर थाना की पुलिस ने इस मामले में जांच करने के बजाय अदालत में केस की अनट्रेस रिपोर्ट 21 अक्टूबर, 2008 को लगाते हुए मामला बंद करने की गुजारिश की। अदालत में जब 10 नवंबर, 2008 को पुलिस की अपील पर बहस हुई तो पता चला कि अदालत से योगेंद्र पाल हत्याकांड की केस फाइल ही गायब है।इस संबंध में तत्कालीन मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सनातन प्रसाद की अदालत ने जब अहलमद से जवाब मांगा तो उन्हें बताया गया कि केस ट्रांसफर होने के कारण केस फाइल इधर-उधर हो गई है जिसे जल्द ही ढूंढ लिया जाएगा। इसके बाद तारीख पर तारीख पड़ती रही, लेकिन केस फाइल के बारे में कुछ जानकारी नहीं मिली। उसके बाद मामले के अधिवक्ता ने 20 अक्टूबर, 2009 को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पूर्णचंद की अदालत में मामले की केस फाइल दिखाने की अपील की।अदालत ने 2 नवंबर को कोर्ट के तत्कालीन अहलमद राजकुमार से केस फाइल के संबंध में पूछताछ की तो उसने बताया कि जब कोर्ट से केस ट्रांसफर हुए थे तो उसने वकील मर्डर केस की फाइल दूसरे अहलमद को सौंप दी थी। इस पर अदालत ने अहलमद को निर्देश दिया कि वह उन्हें वे सरकारी दस्तावेज एवं रजिस्टर दिखाए जिसमें उन्होंने दूसरे अहलमद को केस फाइल सौंपते समय हस्ताक्षर लिए थे। उसने केस फाइल दूसरे अहलमद को दी है या नहीं, इसका पुख्ता प्रमाण अदालत के समक्ष 4 दिसंबर तक पेश करे।
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