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विदेशी विधि कम्पनी द्वारा आयकर की बाध्यता वाले मामले पर विचार करने का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कम्पनियों और व्यापारियों को कानूनी सलाह देने के लिए पेशेवर फीस लेने वाले विदेशी विधि कम्पनी (ला फर्म) के देश में आयकर भरने की बाध्यता सम्बंधी मामले पर विचार करने का फैसला किया है। न्यायाधीश एस एच कपाडिया के नेतृत्व वाली खण्डपीठ ने इस मामले में आयकर विभाग की याचिका पर लंदन की एक ला फर्म को नोटिस जारी किया है। इस ला फर्म का दावा है कि वह भारत में कोई भी आयकर भरने के लिए बाध्य नहीं है क्योंकि वह भारत में अपना कामकाज नहीं चलाती है और उस पर केवल ब्रिटिश कर कानून मान्य हैं। आयकर विभाग ला फर्म की इस दलील से सहमत नहीं है। उसका कहना है कि इससे भारत को भारी आयकर घाटा उठाना पड़ता है क्योंकि भारतीय कॉरपोरेट कम्पनियां कानूनी सलाह पर होने वाले व्यय के लिए कर छूट का दावा करती हैं। इसलिए उसे विदेशी ला फर्मो से आयकर वसूलने का हक है। भारत में पेशवरों को 10.5 प्रतिशत की दर से आयकर भरना पडता है।
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