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पुत्री रिलायंस को कानूनी सलाह देती है, सुप्रीम कोर्ट जज को अब पता चला: रिलायंस गैस मामले से हुए अलग
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर वी रविंद्रन ने मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के बीच गैस आपूर्ति और कीमत को लेकर विवाद की सुनवाई कर रही तीन सदस्यीय खंडपीठ से स्वयं को अलग कर लिया है। न्यायाधीश रविंद्रन की बेटी बेंगलुरु स्थिति एक कंपनी एबीजे पार्टनर्स में काम करती है। एबीजे पार्टनर्स मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज को वैश्विक स्तर पर अधिग्रहण के मामलों में कानूनी सलाह देती है। इस तथ्य के खुलासे के बाद रविंद्रन ने 4 नवम्बर को, स्वयं को इस मामले से अलग कर लिया। न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें सप्ताहांत में अपनी बेटी की कंपनी के रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ संबंधों के बारे में पता चला।प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन और न्यायाधीश पी सतशिवम के साथ रविंद्रन इस चर्चित कानूनी विवाद की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने मामले से अलग होने की जानकारी उस वक्त दी, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से वकील हरीश साल्वे अपनी दलील पूरी करने वाले थे। साल्वे को लगातार सातवें दिन बहस जारी रखनी थी। न्यायाधीश के मामले से अलग होने के बाद इस मामले को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। नई खंडपीठ मामले की नए सिरे से सुनवाई करेगी।
2 ने गवाही दी:
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हा-हा, अब जैसे मर्जी लीपापोती कर लो लेकिन इस देश की भर्ष्टाचार की जननियों की लिस्ट में जुडीसियरी भी टॉप लिस्ट में ही आती है !
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यह संभव है कि पहले जज साहब को पता न हो कि उन की बेटी रिलायंस की सलाहकार है। यह भी हो सकता है कि जज की बेटी होने के कारण ही रिलायंस ने उसे अपना सलाहकार बनाया हो। फिर भी स्वतः ही इस मामले से खुद को अलग कर लेना जज साहब की नैतिकता को ही प्रदर्शित करता है।