आइए मुकद्दमे तलाशें

  • सुप्रीम कोर्ट ने खैर के पेड़ काटने पर लगा प्रतिबंध हटाया

    सुप्रीम कोर्ट ने खैर के पेड़ काटने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश केजी बालाकृष्णन, न्यायधीश एसएच कपाहडिया, न्यायधीश आफताब आलम की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में हर दस साल बाद होने वाला खैर पेड़ कटान पर कोई रोक नहीं होगी। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 28 मई 2008 को वन भूमि में लगे खैर के पेड़ काटने पर प्रतिबंध लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश वरिष्ठ अधिवक्ता जेएस अत्री, एनके शर्मा और यू.यू ललित की दलीलें सुनने के बाद दिए। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 10 साल बाद होने वाले खैर के पेड़ की कटान पर पाबंदी लगा दी थी। इस को बलदेव भंडारी और अशोक कुमार शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।


    उधर, खैर के पेड़ की कटान पर प्रतिबंध लगने पर हिमाचल सरकार ने भी एप्लीकेशन फॉर क्लेरीफिकेशन सुप्रीम कोर्ट में डाली। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सेंट्रल इंपावरमेंट कमेटी के हवाले कर इस पर रिपोर्ट मांगी। सेंट्रल इंपारवरमेंट कमेटी ने कांगड़ा, ऊना, सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर में सर्वे किया। कमेटी ने सर्वे में पाया कि खैर की लकड़ी काफी कीमती होने के कारण लोगों ने अपनी निजी भूमि पर काफी पेड़ लगा रखे हैं। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अगर खैर के पेड़ों पर लगा प्रतिबंध जारी रहता है तो लोग इसके पौधे नहीं लगाएंगे। यह न राज्य के हित में होगा और न ही जनता के हित में। सेंट्रल इंपावरमेंट कमेटी ने यह सर्वे रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में रखी और खैर के पेड़ की कटान पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

    सेंट्रल इंपारवमेंट कमेटी, हिमाचल प्रदेश सरकार और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले याचिकर्ता की तरफ से रखी गई दलीलें सुनने के बाद भूमि सरंक्षण अधिनियम 1978 के मुताबिक खैर के पेड़ काटने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है।

0 ने गवाही दी:

अदालत के मुरीद

सुप्रीम कोर्ट पर एक वीडियो

भरोसा

कैसे कैसे मुकद्दमे

न्याय यहाँ भी मिलता है