आइए मुकद्दमे तलाशें

  • 'अदालतें बनाने के लिए पैसे नहीं; मंत्रियों, अधिकारियों पर खर्च हो सकता है?': चीफ जस्टिस-हाई कोर्ट

    सरकारी अनुदान राशि के अभाव में पंजाब की जिला अदालतों के परिसरों में निर्माण कार्य लंबित होने के मामले की सुनवाई के दौरान 29 अक्टूबर को पंजाब—हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने बेहद कड़ी टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस तीर्थ सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार के पास धन नहीं हैं तो धन जुटाने के उपाय करने होंगे। ऐसे में यह देखना होगा कि मंत्रियों और अधिकारियों पर कितना रुपया खर्च हो रहा है और ये खर्च कैसे पूरे हो रहे हैं। चीफ जस्टिस ने खुद की सुरक्षा में कटौती करने का सुझाव देते हुए यह भी कहा कि सरकार चाहे तो उनकी सुरक्षा वापस ले ले और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में भी कटौती करे। इस पर पंजाब सरकार के वकील ने कहा कि मुख्यमंत्री व चीफ जस्टिस की सुरक्षा में कमी नहीं की जा सकती, तो चीफ जस्टिस ने कहा कि धन जुटाने के उपाय तो करने ही होंगे। अदालतों का निर्माण कार्य रोका नहीं जा सकता है। मुख्य सचिव निजी स्तर पर इस मामले को निगरानी में रखें।


    चीफ जस्टिस तीर्थ सिंह ठाकुर, जस्टिस महेश ग्रोवर की बेंच ने अगली सुनवाई 23 नवंबर को तय की है। नकोदर जिला अदालत बार एसोसिएशन ने याचिका दायर कर जिला अदालत परिसर का निर्माण कार्य पूरा कराए जाने की मांग की थी। पंजाब सरकार के गृह विभाग के उप सचिव भारत भूषण ने शपथपत्र के माध्यम से कहा कि केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना के मुताबिक केंद्र 92.66 करोड़ रुपये का अपना हिस्सा जारी नहीं कर रहा है जिससे अदालतों का निर्माण का कार्य अधर में है। पंजाब सरकार ने अपने हिस्से के 102 करोड़ रुपये में से 51 करोड़ रुपये ही जारी किए हैं।

1 ने गवाही दी:

  1. अदालतें राज्य का उतना ही अहम् हिस्सा हैं जितना की सरकारें। देश में न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाए रखना है तो अदालतों को अपने हिस्से को इसी तरह छीनना होगा वर्ना देश तो अराजकता के द्वार पर खड़ा है।

अदालत के मुरीद

सुप्रीम कोर्ट पर एक वीडियो

भरोसा

कैसे कैसे मुकद्दमे

न्याय यहाँ भी मिलता है