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केन्द्रीय मंत्री पर अग्रिम जमानत के मामले पर हाईकोर्ट जज को प्रभावित करने का आरोप
एक आपराधिक मामले में मद्रास हाई कोर्ट के एक जज को केंद्रीय मंत्री द्वारा कथित रूप से प्रभावित करने की कोशिश के मामले ने गुरुवार को संसद में तूल पकड़ा। विपक्ष ने इस मंत्री को बर्खास्त किए जाने की मांग की। एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता ने तो यहां तक कह डाला कि यह मंत्री कोई और नहीं ए. राजा हैं। हालांकि, राजा ने इस आरोप को गलत बताया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन ने कहा कि इस घटना से मुझे दुख हुआ है। जब उन से पूछा गया कि क्या जज को मंत्री का नाम सामने नहीं लाना चाहिए? तो उन्हों ने कहा कि वह जितना कर सकते थे, किया है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि जज आर. रघुपति को उन्हें कॉल करने वाले का नाम बताना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि या तो किसी को सार्वजनिक रूप से ऐसा बोलना नहीं चाहिए और अगर बोल दिया है तो सभी तथ्यों के साथ सामने आना चाहिए जिस से कार्रवाई की जा सके।
राज्यसभा में यह मुद्दा विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने उठाया और संदेह प्रकट किया कि मामले में शामिल मंत्री ए. राजा हो सकते हैं। उन्हों ने मांग की कि प्रधानमंत्री को तुरंत इस मंत्री हटा देना चाहिए, सीपीएम और एआईएडीएमके ने इसका समर्थन किया। राजा का नाम लेते हुए जयललिता ने दावा किया है कि जिस डॉक्टर की अग्रिम जमानत के मामले में जज को प्रभावित करने की कोशिश की गई वह राजा के शहर पेरंबलूर का और वहां डॉक्टर की बिल्डिंग में मंत्री का वकालत का कार्यालय ऑफिस था। राजा ने इन आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। इस मुद्दे पर तमिलनाडु में पूरा विपक्ष विधानसभा से वॉकआउट कर गया।
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