ICICI Bank को कर्ज वसूली के लिए सख्ती पर हिदायत
कर्ज वसूली के लिए गुंडों के इस्तेमाल पर सुप्रीमकोर्ट ने वित्तीय संस्थानों व बैंकों से कहा है कि यह याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि वे कानून से बंधे हैं। कर्ज वसूली या वाहन जब्ती सिर्फ कानूनी ढंग से ही की जानी चाहिए। आईसीआईसीआई बैंक ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल कर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में बैंक के कर्ज वसूली के तौर तरीकों पर की गई तीखी टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी व दलवीर भंडारी की पीठ ने आईसीआईसीआई बैंक की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह बात कही है। पीठ ने हाईकोर्ट की टिप्पणिया हटाने की बैंक की मांग ठुकराते हुए कहा, जब हाईकोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि बैंक के खिलाफ लंबित मामले में इन टिप्पणियों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा तो फिर ऐसे में इसकी जरूरत नहीं रह जाती। यही नहीं, कोर्ट ने बैंक को प्रतिपक्षी शांति देवी शर्मा को 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करने का आदेश दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2006 में शांति देवी शर्मा की कर्ज वसूली के लिए बैंक पर अपमानित व प्रताड़ित करने की शिकायत पर जांच के आदेश दिए थे। साथ ही कर्ज वसूली के लिए बैंक द्वारा अपनाये जा रहे गैरकानूनी तरीकों पर भी तीखी टिप्पणियां की थीं। शांति देवी ने हाईकोर्ट में शिकायत कर आरोप लगाया था कि आईसीआईसीआई बैंक के वसूली एजेंटों के दुर्व्यवहार व मोटर साइकिल वापस छीन लेने से अपमानित होकर उनके बेटे ने खुदकुशी कर ली है। शांति ने बैंक पर प्रताड़ित और अपमानित कर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया था। इस शिकायत पर हाईकोर्ट ने मामला दर्ज कर जांच करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने बैंक के खिलाफ कुछ टिप्पणियां भी की थीं।
सुप्रीमकोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा बैंकों द्वारा कर्ज वसूली के लिए अपनाए जा रहे गैरकानूनी तौर तरीकों का था। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को यह याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि हम एक सभ्य देश में रहते हैं जहां कानून का शासन चलता है। पीठ ने कर्ज वसूली के तौर तरीकों पर रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों को उद्धृत किया है।
पीठ ने कहा है कि बैंक पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच शीघ्र बल्कि तीन माह के भीतर पूरी की जाए। इसके बाद संबंधित पुलिस उपायुक्त दिल्ली हाईकोर्ट में जांच रिपोर्ट दाखिल करेंगे। तब हाईकोर्ट मामले की सुनवाई करेगा।

इंटरनेट की दुनिया पर अदालत की लोकप्रियता के बारे में बहुत कुछ लिखने की इच्छा थी, किन्तु पोस्ट बड़ी हो जाने का भय है। फिर कभी सही। बस एक बात कहीं कचोटती है कि 




3 ने गवाही दी:
उचित नि्र्णय।
निर्णय तो उचित है मगर ढील का लोग बेजा इस्तेमाल भी तो कर रहे हैं. क्षमता के बाहर का लोन लोग ले रहे हैं और देने वाले दे रहे हैं.
अदालत ने सही निर्णय दिया है. हमने बचपन में पढ़ा था - जितनी चादर हो उतने पैर पसारिये. आज कल लोग अपनी छमता से अधिक उधार लेने लगे हैं. उधार मिल रहा इस लिए गैर जरूरी वस्तुएं भी खरीदने लगे हैं. उधार लेने वालों को भी संयम बरतना चाहिए.
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