इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि यदि कोई विवाहिता, पति की नपुंसकता से हताश होकर आत्महत्या करती है तो ऐसे अपराध के लिए नपुंसक पति भी कानूनी रूप से जिम्मेदार होगा। यह निर्णय न्यायमूर्ति बरकत अली जैदी ने गौतमबुध्द नगर निवासी कुलदीप सिंघल की दूसरी जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया। गौतमबुध्द नगर के मंदेश्याम नगर मुहल्ला निवासी कुलदीप के खिलाफ दनकौर थाने में आईपीसी की धारा 304बी एवं 498ए के तहत दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज है। उसकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। सत्र न्यायालय से जमानत प्रार्थना पत्र खारिज होने के बाद उसकी ओर से उच्च न्यायालय में दाखिल पहली अर्जी 25 जुलाई 2006 को खारिज हो गई थी।
दूसरे प्रार्थना पत्र में मामले के विचारण में अभियोजन पक्ष के एक गवाह के बयान को जमानत का आधार बनाया गया। कहा गया कि अभियोजन साक्षी उमेश कुमार ने विचारण के दौरान जिरह में कहा है कि कुलदीप की नपुंसकता के कारण उसकी पत्नी ने खुदकुशी कर ली। इस आधार पर कहा गया कि इस बयान से स्पष्ट होता है कि पत्नी को आत्महत्या के लिए कुलदीप ने नहीं उकसाया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि यदि अभियोजन साक्षी उमेश के कथन को सही मान भी लिया जाए तो भी इसका लाभ आरोपी पति को नहीं मिलेगा। वह नपुंसक है या नहीं, इस बात का कोई चिकित्सीय साक्ष्य नहीं है परंतु यदि इस तथ्य को सही मान लिया जाए तो पत्नी की खुदकुशी के लिए नपुंसक पति भी जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे मामलों में नपुंसक पति आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी होगा क्योंकि पत्नी ने आत्महत्या, पति की नपुंसकता से हताश होने पर की।
Friday, May 9, 2008
नपुंसकता के कारण आत्महत्या, तो पति भी दोषी
Subscribe to:
Post Comments (Atom)



1 comments:
यह सही निष्कर्ष नहीं है. न्यायालय द्वारा तकनीकी संदर्भ में कही गई बात को प्रेस ने गलत तरीके से अभिव्यक्त किया है।
इस तरह तो किसी पति द्वारा बन्ध्या होने पर किसी भी महिला को भी पति की आत्महत्या के लिए दोषी माना जाने लगेगा। पत्नी का बंन्ध्य़ा होना उस के लिए अपराध हो जाएगा।
Post a Comment